संज्ञा की परिभाषा, संज्ञा के प्रकार व उदाहरण
संज्ञा - सम् + ज्ञा जिसका शाब्दिक अर्थ होता है - 'अभिज्ञान या पहचान' अर्थात ठीक ज्ञान कराने वाला
परिभाषा - किसी व्यक्ति, प्राणी, वस्तु, पदार्थ, स्थान, भाव या दशा के नाम को सज्ञा कहते है ।
जैसे -
वस्तुएँ - पुस्तक, पंखा, जूता, मेज, दूध, मिठाई
प्राणी - गाय, बकरी, मेमना, राम, रहीम, कबूतर
स्थान - मुम्बई, जयपुर, कोलकाता, चौराहा, कॉलोनी
गुण - ईमानदारी, अच्छाई, होशियार, बेइमानी
अवस्था - जवान, बचपन, बुढ़ापा
भाव - अपनापन, पराया, सुखी
विद्यमान है या फिर जिसके विद्यमान होने की कल्पना की जा सकती है। किसी के नाम को संज्ञा कहते है। जैसे -
वस्तुएँ - पुस्तक, पंखा, जूता, मेज, दूध, मिठाई
प्राणी - गाय, बकरी, मेमना, राम, रहीम, कबूतर
स्थान - मुम्बई, जयपुर, कोलकाता, चौराहा, कॉलोनी
गुण - ईमानदारी, अच्छाई, होशियार, बेइमानी
अवस्था - जवान, बचपन, बुढ़ापा
भाव - अपनापन, पराया, सुखी
हिन्दी भाषा मे प्रायः संज्ञा के तीन प्रमुख भेद होते है जो निम्नांकित है।
( 1 ) व्यक्तिवाचक संज्ञा
( 2 ) जातिवाचक संज्ञा
( 3 ) भाववाचक संज्ञा
( 1 ) व्यक्तिवाचक संज्ञा
शब्द से किसी खास या एक ही व्यक्ति, खास वस्तु, तथा किसी विशेष स्थान का बोध होता है। उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते है।
जैसे -
सभी स्त्री व पुरुषों के नाम - राम, सीता, मोहन, हामिद, सूरज आदि।
सभी सागर के नाम - अरब सागर, प्रशांत महासागर आदि।
देशों के नाम - भारत, इंग्लैंड, अमेरिका, श्री लंका आदि।
सभी दिशाओं के नाम - पूर्व, पश्चिम, उत्तर आदि।
नदियों के नाम - गंगा, यमुना, सरस्वती, चम्बल आदि।
खगोलीय पिंडों के नाम - पृथ्वी, मंगल शनि, सूर्य, चंद्रमा आदि।
सभी महीनों और दिनों के नाम - जनवरी, फरवरी, सोमवार, मंगलवार आदि।
सभी पुस्तकें और समाचार पत्रों के नाम - रामायण, महाभारत, दैनिक भास्कर, दैनिक नवज्योति आदि।
त्यौहार के नाम - दीपावली, ईद, होली आदि।
नगरों के नाम - जेवर, दिल्ली, न्यूयॉर्क आदि।
पर्वत व पहाड़ों के नाम - माउंट एवरेस्ट, गुरु शिखर आदि।
सभी स्त्री व पुरुषों के नाम - राम, सीता, मोहन, हामिद, सूरज आदि।
सभी सागर के नाम - अरब सागर, प्रशांत महासागर आदि।
देशों के नाम - भारत, इंग्लैंड, अमेरिका, श्री लंका आदि।
सभी दिशाओं के नाम - पूर्व, पश्चिम, उत्तर आदि।
नदियों के नाम - गंगा, यमुना, सरस्वती, चम्बल आदि।
खगोलीय पिंडों के नाम - पृथ्वी, मंगल शनि, सूर्य, चंद्रमा आदि।
सभी महीनों और दिनों के नाम - जनवरी, फरवरी, सोमवार, मंगलवार आदि।
सभी पुस्तकें और समाचार पत्रों के नाम - रामायण, महाभारत, दैनिक भास्कर, दैनिक नवज्योति आदि।
त्यौहार के नाम - दीपावली, ईद, होली आदि।
नगरों के नाम - जेवर, दिल्ली, न्यूयॉर्क आदि।
पर्वत व पहाड़ों के नाम - माउंट एवरेस्ट, गुरु शिखर आदि।
( 2 ) जातिवाचक संज्ञा
हिन्दी भाषा के ऐसे शब्द जो किसी जाति, समूह, पदार्थ आदि को बोध करवाये जातिवाचक संज्ञा कहलाती है ।
जातिवाचक संज्ञा शब्दों से एक जाति के अंतर्गत आने वाले सभी व्यक्तियो, वस्तुओं व स्थानों का बोध होता है।
जैसे - नगर, पशु, पक्षी, जानवर, छात्र, अध्यापक, फल, सब्जी, कवि, लेखक, पुस्तक, भाई, पहाड़, स्त्री, बहादुर, सेना, गाय, नगर, मकान, कक्षा, भीड़, दरबार/सभा, सोना, दूध, पानी, घी, तेल, मक्ख़न, कपड़ा आदि।
जातिवाचक संज्ञा शब्दों से एक जाति के अंतर्गत आने वाले सभी व्यक्तियो, वस्तुओं व स्थानों का बोध होता है।
जैसे - नगर, पशु, पक्षी, जानवर, छात्र, अध्यापक, फल, सब्जी, कवि, लेखक, पुस्तक, भाई, पहाड़, स्त्री, बहादुर, सेना, गाय, नगर, मकान, कक्षा, भीड़, दरबार/सभा, सोना, दूध, पानी, घी, तेल, मक्ख़न, कपड़ा आदि।
उपरोक्त उदाहरणों के आधार पर हम जातिवाचक संज्ञा को दो भागों में विभक्त कर सकते है।
(i) द्रव्यवाचक संज्ञाएं - पानी, दूध, घी, तेल, आदि।
(ii) समूहवाचक या समुदाय - भीड़, सेना, दल, जनता, पुलिस आदि।
जातिवाचक संज्ञा के और उदाहरण -
नगर - नगर एक जातिवाचक संज्ञा है क्योंकि नगर का कोई भी नाम हो सकता है जैसे - जयपुर, दिल्ली, मुम्बई आदि। लेकिन ये सब बोलने पर नगर कहे जाते है।
गाय - गाय की कई प्रजातियां होती है जैसे हरयाणवी, जर्सी आदि। लेकिन सामुहिक रूप से इन सभी प्रजातियों को गाय कह कर पुकारा जाता है। अतः गाय सब्द सभी गायों का बोध कराती है।
खनिज - जैसा कि ज्ञात है खनिज कई प्रकार के होते है जैसे सोना, तांबा लोहा आदि। ये सभी मिलकर एक जाति का निर्माण करते है जिन्हें एक साथ बोलने पर खनिज कहा जाता है। ये सभी प्रकार के खनिजो का बोध कराते है।
जातिवाचक संज्ञा के और उदाहरण -
नगर - नगर एक जातिवाचक संज्ञा है क्योंकि नगर का कोई भी नाम हो सकता है जैसे - जयपुर, दिल्ली, मुम्बई आदि। लेकिन ये सब बोलने पर नगर कहे जाते है।
गाय - गाय की कई प्रजातियां होती है जैसे हरयाणवी, जर्सी आदि। लेकिन सामुहिक रूप से इन सभी प्रजातियों को गाय कह कर पुकारा जाता है। अतः गाय सब्द सभी गायों का बोध कराती है।
खनिज - जैसा कि ज्ञात है खनिज कई प्रकार के होते है जैसे सोना, तांबा लोहा आदि। ये सभी मिलकर एक जाति का निर्माण करते है जिन्हें एक साथ बोलने पर खनिज कहा जाता है। ये सभी प्रकार के खनिजो का बोध कराते है।
(3) भाववाचक संज्ञा
वे शब्द जो व्यक्तिवाचक या जातिवाचक संज्ञाओं की अवस्था, दशा, भाव आदि का बोध कराते हो, भाववाचक संज्ञा कहलाती है।
भाववाचक संज्ञा के दो भेद है -
(क) मूल भाववाचक संज्ञा - प्रेम, त्याग, घृणा, क्रोध, हर्ष, शोक, दया, करुणा आदि।
(ख) यौगिक भाववाचक संज्ञा - निम्न प्रत्ययों का प्रयोग करके यौगिक भाववाचक शब्द का निर्माण किया जा सकता है।
(1) ता - प्रसन्नता, मानवता, सुंदरता, सज्जनता, निर्मलता, कठोरता आदि सभी स्त्रीलिंग और एकवचन होते हैं।
(2) त्व- गुरुत्व, अपनत्व, बंधुत्व, नारीत्व, आदि। सभी पुर्लिंग और एकवचन होते है।
(3) पन - बचपन, पागलपन, लडकपन, अपनापन
(4) आपा - बुढ़ापा, मोटापा
(5) आई - लिखाई, पढाई , कमाई , खिचाई, सिचाई, लड़ाई
(6) ई - सर्दी, गर्मी, नमी, खुशी, बीमारी।
(7) अ - खेल, मेल।
(8) आवट - लिखावट, थकावट, मिलावट
एक संज्ञा का दूसरी संज्ञा में प्रयोग
एक संज्ञा का दूसरी संज्ञा में प्रयोग
भाववाचक संज्ञा का जातिवाचक रूप में प्रयोग - जब भाववाचक संज्ञा बहुवचन में प्रयुक्त होती है तो वह जातिवाचक बन जाती है।
जैसे -
* हमें हमेशा अच्छाइयाँ करो।
* भारत और रूस के बीच जल्द ही नजदीकियाँ बढ़ गई।
* मेहनत करने से सफलताएँ मिलती है।
यहाँ अच्छा से अच्छाइयाँ, नजदीक से नजदीकियाँ और सफलता से सफलताएँ बहुवचन में प्रयुक्त होने से ये सभी जातिवाचक बन गई है।
व्यक्तिवाचक संज्ञा का जातिवाचक संज्ञा में प्रयोग - जब कोई व्यक्तिवाचक संज्ञा की व्यक्ति विशेष का बोध ना करवाकर उस व्यक्ति विशेष के गुण/दोष के समान अन्य अनेक व्यक्तियों का बोध करवाती है तो वह फिर जातिवाचक संज्ञा बन जाती है।
जैसे
* कुम्भकरण मत बनो।
उपरोक्त वाक्य में कुंभकरन जातिवाचक संज्ञा को सूचित करता है ना कि व्यक्तिवाचक संज्ञा को। इस वाक्यों में कुंभकरण अत्यधिक देर तक सोने वाले व्यक्तियों को सूचित करता है।
* मोहन ने अपनी तरह इस गाँव मे सभी को हरिश्चंद्र बना दिया।
यहाँ हरिश्चंद्र गाँव मे सभी सच बोलने वाले व्यक्तियों को प्रदर्शित करता है।
जातिवाचक संज्ञा का व्यक्तिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग
जब कोई जातिवाचक संज्ञा सम्पूर्ण जाति का बोध न कराकर किसी व्यक्ति विशेष का बोध कराये तो वह व्यक्तिवाचक संज्ञा बन जाती है।
जैसे -
* नेताजी ने आजाद हिंद फौज का गठन किया।
उपरोक्त वाक्य में नेताजी, सुभाष चंद्र बोस के लिए प्रयुक्त हुआ है।

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